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सोमवार, 25 अप्रैल 2011

कान्हा तुम्हारी याद में राधा पुकारती

कान्हा तुम्हारी याद में कलियाँ पुकारती -२-
काँटों की शैया पर कैसे रातें  गुजारतीं
कान्हा तुम्हारी याद में.........................

कान्हा तुम्हारी याद में राधा पुकारती -२-
रो - रो के प्रेम दीवानी जीवन गुजारती 
 कान्हा तुम्हारी याद में....................

कान्हा तुम्हारी याद में मीरा पुकारती-२-
पग घुँघरू बाँध दीवानी तुमको रिझाती 
 कान्हा तुम्हारी याद में........................

कान्हा तुम्हारी याद में शबरी पुकारती-२-
राम आयेंगे इस आस में रस्ता बुहारती 
 कान्हा तुम्हारी याद में ........................

कान्हा तुम्हारी याद में गोपियाँ पुकारती -२-
परसों आऊँगा की बाट में  रस्ता निहारतीं 
 कान्हा तुम्हारी याद में .........................

कान्हा तुम्हारी याद में भक्त मण्डली पुकारती -२-
गा - गा के गीत तुम्हारे जीवन गुजारती 
 कान्हा तुम्हारी याद में ........................

कान्हा तुम्हारी याद में दासी पुकारती -२- 
नयनों की प्यास को अब कैसे संभालती 
कान्हा तुम्हारी याद में ..........................

गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

"मै" और" मेरा"

अहंकार के दो बच्चे
"मै" और" मेरा"
खूब फ़ले फ़ूले
अहंकार की चाशनी मे
बहुत मीठे लगे
वक्त के साथ
परवान चढते रहे
अहंकार के शिखर
तक पहुंच गये
और फिर लगी
इक ठेस
और धरातल भी
नसीब ना हुआ
"मै" तो पल मे
चकनाचूर हुआ
दर्प अहंकार का
नेस्तनाबूद हुआ
जब "मेरा" ने
उसे दुत्कार दिया
"मै" ने "मेरा" को
कुछ ऐसे पोषित किया
"मेरा" ने "मै" का
सब कुछ छीन लिया
अब ना "मै" है
ना "मेरा" है
जीवन मे आया
नया सवेरा है
छोड दिया "मै" ने
"मेरा" को और
ओढ ली चादर
हरि नाम की
तन राखा संसार मे
मन कर दिया अर्पण
कृपानिधान को

रविवार, 17 अप्रैल 2011

मुझे शिला बनाया होता

मुझे शिला बनाया होता
अहिल्या सा तारने को
फिर राम बनकर आया होता

मुझे गंवारिन  ही बनाया होता   
शबरी सा तारने को 
फिर राम बनकर आया होता

मुझे सखी अपनी बनाया होता
द्रौपदी की लाज बचाने को
फिर श्याम बन कर आया होता 

श्याम कुछ तो अपना बनाया होता
चाहे खाक ही चरणों की बनाया होता
फिर धूल झाड़ने को ही सही
अपना हाथ तो बढाया होता 

मुझे भी गले से लगाया होता
एक बार श्याम मेरे 
मन मंदिर में तो आया होता 
एक फूल प्रेम का
मुझमे भी खिलाया होता  
फिर चाहे राम बनकर 
चाहे श्याम बनकर
आया होता  
मुझे भी प्रेमरस 
पिलाया होता

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

फॅमिली बैकग्राउंड

दोस्तों
अभी कुछ दिन पहले मुझसे रश्मि जी ने ये प्रश्न पूछा था और उसका जवाब मैंने ये लिखकर दिया था ...........ये तो थी मेरी सोच अब आप बताइए आप इस बारे में क्या सोचते हैं 


फॅमिली बैकग्राउंड का क्या अर्थ है ? पूरी तरह से सोचकर लिखें ... शब्दिकता पर न जाएँ.




आज के युग में लोग फॅमिली का ही अर्थ नहीं जानते तो फॅमिली बैकग्राउंड  का अर्थ कहाँ समझेंगे . फिर भी एक कोशिश करती हूँ इसे अपने नज़रिए से अर्थ देने की.


मेरे ख्याल से फॅमिली बैकग्राउंड से सीधा अर्थ तो ये ही निकलता है कि-----------

  1. एक फॅमिली के लोग और उनके पूर्वज कैसे थे या कैसे हैं , उन सबके ख्यालात कैसे हैं ?
  2. आधुनिकता की सिर्फ चादर ओढ़े हैं या असलियत में उनके विचारों में परिपक्वता है ?
  3. उनके रहन सहन का तरीका कैसा है?
  4. बोलचाल की भाषा कैसी है ?
  5. सभ्य और सुसंस्कृत है या जैसा देश वैसा भेष वाली है ?
  6. वो क्या काम करते हैं? काम को लेकर कितने serious हैं ?
  7. धार्मिकता का सिर्फ लबादा ही ओढ़ रखा है या वास्तव में संस्कार वान हैं ?
  8. समाज में उनका क्या स्थान है ? कहीं ऐसा तो नहीं सामने तो सब झुककर सलाम करते हों और पीछे से गाली देते हों ?
  9. इन्सान का व्यवहार ही उसकी पहचान होता है .छोटों से कैसा और बड़ों से कैसा व्यवहार करते हैं और हमउम्र से कैसे मिलते हैं ?
  10. अभिमान और दंभ ही तो उनके आभूषण नहीं ? या सहनशीलता , दया और परोपकार ही उनके आभूषण हैं ?

इस तरह की अनेकों चीजें होती हैं जो एक फॅमिली के लिए धरातल बनाती हैं जिनसे उस फॅमिली के बारे में सही आकलन किया जा सकता है .




इसकी तह तक कैसे जायेंगे और क्या वही होता है जिसके लिए हम तथाकथित बैक ग्राउंड देखते हैं ?


ये एक बहुत ही मुश्किल प्रश्न है और जिसका उत्तर तलाशने निकले इन्सान को उसका सही जवाब मिल जाये ये कहना मुमकिन नहीं है क्योंकि हम सभी सिर्फ कुछ पहलुओं पर ही गौर करके आगे की कार्यवाही रोक देते हैं और सोचते हैं कि  जिसकी इतनी बातें सही हैं तो वो सच में सही होगा फिर बाद में धोखा खाने पर हाथ मलने के सिवा और कुछ नहीं मिलता .
हर काम को जितनी लगन और सहनशीलता से किया जाये वो उतना ही अच्छा फल देता है और अगर किसी का फॅमिली  बैकग्राउंड देखना हो तो उसके लिए तो बहुत ही धैर्य से काम लेना होगा .........अपनी आँख और कान चौकन्ने रखने होंगे, किसी की कही बातों पर विश्वास न करके खुद जांचना परखना चाहिए .........हर कदम फूंक फूंक कर रखना चाहिए तभी ये संभव हो सकता है कि मनोवांछित परिणाम प्राप्त हो ............और यदि एक बार धैर्य और लगन से काम कर लिया जाए , छानबीन कर ली जाए तो ज़िन्दगी भर का आराम और दिमागी तसल्ली  मिल जाती है ..........ये पता चल जाता है कि जिसके बारे में हमने जानकारी हासिल की है - वो कैसा है ? हमारी कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं .........एक बार पता चल जाये तो निर्णय लेने में आसानी होती है और ज़िन्दगी को नयी दिशा मिल जाती है .
सिर्फ किसी के कहने भर से या किसी को जानने भर से हम उसके बारे में कोई आकलन नहीं कर सकते .इसी का असर हमारे निर्णय पर पड़ता है और एक सही निर्णय ही ज़िन्दगी को सहज और सरल बना सकता है और गलत उम्र भर की मुसीबत . 
इसलिए मेरी दृष्टि में तो इन सब बातों पर गौर करने के बाद ही हम किसी के बारे में या उसकी फॅमिली के बारे में सही आकलन कर सकते हैं. 



बुधवार, 6 अप्रैल 2011

साथी हाथ बढाना…………


भ्रष्टाचार को अब तो
समूल नष्ट करना होगा
सोये हुओ को अब जगना होगा
वरना अन्जाम से डरना होगा
ये सोया शेर जागा है आज
इससे बचना है तो
हथियार डालने होंगे
एक अन्ना के साथ
लाखों करोडों सितारे होंगे
अब आसमाँ को झुकना होगा
जमीन को उसका हक देना होगा
देश को भ्रष्टाचार मुक्त करना होगा
वरना क्रांति ऐसी आयेगी
सब बहा ले जायेगी
शासन की जडें हिला जायेगी
जागो ……सोने वालों
अब तो जागो………
आज सोने की चिडिया को अपने ही लोग खा रहे हैं । भारत तो कल भी सोने की चिडिया था और आज भी है ……क्या कमी है कुछ नही तभी तो देखो इतना धन है कि लोग अपने हाथो खोखला कर रहे हैं……………कल परायो ने लूटा आज अपने लूट रहे हैं अगर ऐसा बिल आ गया होता तो आज देश का नक्शा ही दूसरा होता………विश्व पटल पर जब आज भारत की छवि इतनी ऊँचाइयां प्राप्त कर रही है तो ज़रा सोचिये अगर वो धन जो स्विस बैंक मे जमा है वो यहीं उपयोग होता तो देश कहाँ से कहाँ पहुँच गया होता मगर जब पालनहार ही मारनहार बन जाये तो आम जनता कहाँ जायेगी और देश तो बर्बादी के कगार पर पहुंचेगा ही ऐसे मे अन्ना जी जैसे महापुरुष का कदम एक तडपते हुये इंसान के मूँह मे दो बूँद गंगाजल डालने के बराबर है और इसमे हम सब को सहयोग करना चाहिये ये किसी एक इंसान की नही सारे देश की जनता की आवाज़ है और हम सब इस मुहिम मे उनके साथ हैं…………जय हिंद