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रविवार, 22 मई 2011

अब कैसे मिलन हो पाए?







किशोरी जी तुम बिन
चैन ना आये
कान्हा बुलाये
मन भरमाये
तुम बिन चैन ना आये
एक बार दर्शन
करने को
खुद वृन्दावन आये
फिर भी चैन ना आये
तुम्हारे चरणन के दर्शन को
कान्हा भी दौडा आये
प्रेम की गागर
छलक - छलक जाये
प्रीत की रीत
निभा न पाए 
तुम बिन चैन ना पाये
कान्हा तुम बिन
चैन ना पाये
चरण कमल पर 
बलि बलि जाए
फिर भी उॠण
न हो पाए
प्रेम का मोल
कैसे चुकाए
इतना समझ न पाए
किशोरी जी
कान्हा तुम बिन 
चैन न पाए 
तुम्हरे चरणों में
वास करन को
कान्हा भी अकुलाये  
दिव्य प्रेम के 
आगे उसकी
एक न चलने पाए 

किशोरी जी तुम्हरे
दरस बिन
कान्हा अश्रु बहाये
पर तुम बिन 
चैन न पाए
किशोरी जी
तुम बिन कैसे
कान्हा मुरली बजाये 
हर पल तुम्हारे विरह में
तड़प - तड़प जाये
पर तुम बिन चैन ना पाए
विरह अगन की तीव्र वेदना
कान्हा को झुलसाये
जो बीती तुम्हरे जीया पर
वो कान्हा खुद पर
सहता जाये
पर तुम बिन चैन ना पाये
किशोरी जी 
अब कैसे मिलन हो पाए?
दोस्तों 
ये दुर्लभ चित्र मुझे फ़ेसबुक पर कल मिला
तो सोचा आप सबको भी 
इसके दीदार कराऊँ
और मन मे जो भाव जागृत हुये
वो आपसे साझा कर रही हूँ 
उम्मीद है पसंद आएगा

39 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना कान्हा के मन को चित्रित कर दिया है

SAJAN.AAWARA ने कहा…

Prem me virah kn adbhut dhan se byan kiya hai.,
jai hind jai bharat

रश्मि प्रभा... ने कहा…

किशोरी जी तुम बिन
चैन ना आये
कान्हा बुलाये
मन भरमाये
तुम बिन चैन ना आये
एक बार दर्शन ...मन मुग्द्ध हो उठा

निर्मला कपिला ने कहा…

चित्र तो सच मे दुर्लभ है\ सुन्दर रचना। बधाई।

मीनाक्षी ने कहा…

जाने क्यों राधा के लिए कान्हाजी की इस विरह वेदना को देखकर मीरा की याद आ गई.. भाव भीनी भक्ति पूर्ण रचना..

Bhushan ने कहा…

सुंदर चित्र से उद्दीप्त भावों से लिखी कविता सुंदर बन पड़ी है.

Rakesh Kumar ने कहा…

वंदना जी चित्र बेहद बेहद पसंद आया
और आपकी भाव और भक्ति से पूर्ण अभिव्यक्ति
का भी कोई जबाब नहीं.
आपके राधाजी के चरणों में रम रहें हृदय
को हार्दिक नमन.

आपने मेरी पोस्ट को 'चर्चा मंच' में शामिल किया इसके लिए आपका बहुत बहुत आभार.
परन्तु,मुझे आपके निर्मल सुविचारों की आनंद
वृष्टि की अत्यधिक अपेक्षा है.कृपया,अनुग्रहित कीजियेगा.

kase kahun? ने कहा…

sunder rachna sunder abhivyakti...

विजय रंजन ने कहा…

Kanha ke haath mein Radha ka paanv,
jaise kari dhoop mein sheetal chhanv.

kya tasveer hai ...mera kalakar man bag bag ho gaya aur uspe ye kavita jaise tasveer bol uthi.Bahut badhiya Vandanaji.

सतीश सक्सेना ने कहा…

इस प्यार का आनंद दुर्लभ है ....शुभकामनायें आपको !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

भक्ति में समर्पण की भावना से ओत-प्रोत सुन्दर रचना!
जय श्री कृष्णा!

वीना ने कहा…

प्रेम के आगे किसकी चलती है...
सुंदर रचना...

कुश्वंश ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

भक्तिमयी, भावमयी रचना।

अजय कुमार झा ने कहा…

राधे राधे राधे , बरसाने वाली राधे .....भजन सरीखा आनंद आया जी ..जय हो मुरली मनोहर कृष्ण की जय

BrijmohanShrivastava ने कहा…

कृष्ण के हस्तकमल पर राधाजी के पैर बहुत सुन्दर चित्र चुना आपने और फेसबुक से लाकर अपने पाठकों को दर्शन कराने के लिये धन्यवाद । यदि इस भजन को लयवध्द किया जाये तो अति आनन्द दायक होसकेगा गाने वालों के लिये और श्रोताओं को भी

Patali-The-Village ने कहा…

भाव भीनी भक्ति पूर्ण रचना|धन्यवाद|

अशोक बजाज ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव !

Vaanbhatt ने कहा…

चित्र में छिपे गहन दर्शन को समझाने के लिए साधुवाद...

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

गीत के भाव अधिक सुन्दर हैं या सम्बन्धित चित्र । वास्तव में दोनों ही बेजोड लग रहे हैं ।

Udan Tashtari ने कहा…

वाकई चित्र बहुत उम्दा है और रचना भी सुन्दर बन पड़ी है.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice post.


बेहतरीन है।


औरत
की हक़ीक़त Part 1(औरत-मर्द के रिश्ते की एक अनूठी सच्चाई सामने रखने
वाला एक बेजोड़ अफ़साना) - Dr. Anwer Jamal

वाणी गीत ने कहा…

तुम बिन चैन ना आये ..
मनोहारी चित्र और कविता ने मन मोह लिया ...
बहुत सुन्दर !

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

वंदना जी बहुत सुन्दर चित्र .. कृष्ण की राधा के प्रति समर्पण का उद्दात्त रूप है यह चित्र और उतनी ही सुन्दर है आपकी कविता... काश इस समर्पण को हम समझ पाते आज ... बहुत सुन्दर...

puja ने कहा…

बहुत ही सुंदर...प्रेम की अनूठा उदाहरण....

वीना ने कहा…

बहुत सुंदर वंदना जी..बहुत ही प्यारा और वाकई दुर्लभ चित्र और रचना भी उतनी ही प्यारी....

prerna argal ने कहा…

bahut hi sunder bhav luye krisna radha ke prem ko darsaati bhav poorn rachanaa.badhaai aapko.itanaa sunder chitra ki najaren nahi hat rahi.thanks aapka.


please visit my blog and leave the comments also.

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

बहुत खूब वन्दना जी ;...दूर की कोडी कहाँ से ले आई

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

वाकई चित्र तो दुर्लभ है ही और कान्हा और राधा के प्रेम को जैसे उकेरा है. सारा वातावरण कृष्णमय हो गया. .

Maheshwari kaneri ने कहा…

ईश्वर की महिमा और भक्ति भाव से ओत प्रोत है आप की रचना। चित्र तो सच मे दुर्लभ है……. धन्यवाद

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

जैसा फ़ोटो, वैसी ही बेहतरीन रचना,

Abnish Singh Chauhan ने कहा…

अच्छी लगीं ये पंक्तिया. इस हेतु आपको साधुवाद.

Abnish Singh Chauhan ने कहा…

अच्छी लगीं ये पंक्तिया. इस हेतु आपको साधुवाद.

एस.एम.मासूम ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना .

रेखा ने कहा…

यदि कोई गा के सुनाता तो इस रचना का पूरा आनंद ले पाते.

Patali-The-Village ने कहा…

ईश्वर की महिमा और भक्ति भाव से ओत प्रोत रचना| धन्यवाद|

Anand Dwivedi ने कहा…

वंदना जी ...इस बेचैनी पर दुनिया भर का चैन न्योछावर ....ये बेचैनी मिल जाये तो कहने ही क्या ! बहुत खूब !

Mani Singh ने कहा…

sunder rachna

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

शायद आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर भी हो!
सूचनार्थ