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गुरुवार, 17 जनवरी 2013

ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम



मैं राख का अंतिम श्वास बन जाती .......जो तुम होते
मैं मुखाग्नि का अंतिम कर्म बन जाती .......जो तुम होते
मैं कच्चे घड़े संग चेनाब पार कर जाती .......जो तुम होते
ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम 


जो तुम होते ........एक श्वास धरोहर बन जाती
जो तुम होते ........एक कर्म की मुक्ति हो जाती
जो तुम होते ........एक मोहब्बत परवान चढ़ जाती
ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम


हो सकता ऐसा मुमकिन .........गर हम होते
ऋतु बसंत  भी मदमाती .........गर हम होते
एक दीपशिखा जल जाती ........गर हम होते
ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम 


अश्रुबिंदु ना कभी ढलकाते ...........जो प्रियतम होते
विरह अगन ना कभी सताती ........जो प्रियतम होते
इश्क की ना दास्ताँ बन पाती ........जो प्रियतम होते
ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम 


ना तुम होते ना हम होते ........ये सृष्टि किस पर मदमाती
ना तुम होते ना हम होते .......ये प्यास अधूरी रह जाती
ना तुम होते ना हम होते .......तो प्रेम में अपूर्णता रह जाती
ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम 


अच्छा हुआ जो ना मिले कभी .........खोजत्व पूर्ण हो जाता
अच्छा हुआ जो ना मिले कभी .........निजत्व पूर्ण हो जाता
अच्छा हुआ जो ना मिले कभी .........शिवत्व पूर्ण हो जाता
ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम


अधूरी प्यास, अधूरा तर्पण , अधूरा जीवन .........जरूरी था
जीवन की इकाइयों दहाइयों में अधूरापन ..........जरूरी था
प्रेम का अपूर्ण ज्ञान , अपूर्ण आधार .............जरूरी था
ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम 


अपूर्णता में सम्पूर्णता का आधार ही तो 

व्याकुलता को पोषित करता है .......सत्य था , है , रहेगा
जन्म जन्म की प्यास का अधूरापन ही तो 

घूँट भरने को लालायित करता है .......सत्य था , है , रहेगा
मिलन पर विरह का स्वाद ही तो 

ह्रदय रुपी जिह्वा को आनंदित करता है...........सत्य था , है , रहेगा
ओह ! मेरे किसी जन्म के बिछड़े प्रियतम

8 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

रचना पढ़कर भक्तिरस का संचार होता है!
--
सार्थक लेखन!

Unknown ने कहा…

Aatmbodh karati bhakti bhav se aachadit sundar prastuti

आर्यावर्त डेस्क ने कहा…

प्रभावशाली ,
जारी रहें।

शुभकामना !!!

आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सब कुछ तुम पर रहा समर्पित..

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

इश्वर को प्रियतम मानकर भक्ति और प्रेम को एकाकार करती
अनूठी रचना.वाह वन्दना जी !
New post कुछ पता नहीं !!! (द्वितीय भाग )
New post: कुछ पता नहीं !!!

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर और गहन भक्तिपूर्ण प्रस्तुति..

kavita verma ने कहा…

bahut sundar bhav...bhakti ras se ot prot..

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

अति सुन्दर रचना ....
:-)