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गुरुवार, 20 नवंबर 2014

आज कैसा वक्त आ गया है

आज कैसा वक्त आ गया है जहाँ संत शब्द से इंसान का विश्वास ही उठ गया जहाँ कदम कदम पर ढकोसले बाज सामने आ रहे हों वहाँ कैसे इंसान किसी पर विश्वास कर सकेगा ये तो अलग बात है उससे जरूरी बात है कि अब जनता के विश्वास को कोई इस तरह न ठग सके उसके लिए सरकार ठोस और निर्णायक कदम उठाए ताकि आगे कोई खुद को संत कहने से पहले करोडों बार सोचे या संत बनने से पहले ………आज जरूरी है जितने भी देश में आश्रम खोले हुए हैं उनका हर महीने सरकार द्वारा अवलोकन हो बाकायदा तलाशी अभियान चालू हो और वहाँ सरकार अपना ऐसा कोई बॉक्स आदि लगाये जहाँ वहाँ रहने वाले शिकायत डाल सकें और वहाँ होती अनैतिक गतिविधियों की जानकारी दे सकें और ये बॉक्स सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय जाएं तब जाकर ऐसे आश्रमों की अनैतिक गतिविधियों पर लगाम कसी जा सकती है वरना विचारणीय बात ये है कि एक आश्रम में हथियारों का क्या काम और दूसरी बात तहखाने बनाने आदि जो भी ऐसी जगह हों वो फ़ौरन बंद कर दी जाएं तब जाकर जनता को कुछ विश्वास होगा वरना तो ऐसे लोग फिर वो आसाराम हों या रामपाल या कल कोई और जनता के विश्वास को ठगते रहेंगे ………और सबसे बडी बात क्या संतताई की आड में कल ऐसा नहीं हो सकता कोई आतंक का पर्याय बन जाये या  पडोसी देश का गुप्तचर और वहाँ से आतंकवादी गतिविधियाँ संचालित होने लगें क्योंकि जब एक अदना से इंसान को पकडने के लिए इतनी पुलिस लगी और उसने कमांडो तक तैनात कर रखे थे तो सोचने वाली बात है कल किस हद तक समस्या गहन हो सकती है दूसरे शत्रु देश इसका फ़ायदा उठा सकते हैं तो वो वक्त आए उससे पहले अब जरूरी हो गया है कि हर आश्रम के लिए कडे और सख्त नियम बनाए जाएं फिर चाहे वो कितना ही बडा संत हो ………यदि इन लोगों को इसी तरह छूट दी जाती रही तो देश की सुरक्षा के मद्देनज़र दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं इसलिए सबसे बडी बात देश की सुरक्षा एकता और अखंडता से बडा कोई धर्म नहीं हो सकता ये बात सबको समझ आनी चाहिए …………

5 टिप्‍पणियां:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह! क्या बात!

Rajendra kumar ने कहा…

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (21.11.2014) को "इंसान का विश्वास " (चर्चा अंक-1804)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

Unknown ने कहा…

ससमाज से अंधविश्वास को दूर भगाने की जरूरत है।

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

तथा कथित संतों के आश्रम एक दूकान है जो भगवान के नाम से खोला जाता है लेकिन इन आश्रमों में होता है गैर कानूनी कार्य,मुक्त किये गए बंधकों के अनुसार आश्रम बलात्कार ,हत्या इत्यादि का सुरक्षित स्थान है !
आपने सही कहा है ...इन आश्रमों पर कड़ी नियंत्रण की आवश्यकता है अन्यथा कोई भी राष्ट्रीय संकट उत्पन्न हो सकता है !
आईना !

Unknown ने कहा…

वाह! क्या बात!

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