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शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

अब कैसे धरूँ मैं धीर






गुरु जी अब कैसे धरूँ मैं धीर 
तुम तो गए साकेत धाम को 
तुम तो गए बैकुंठ धाम को 
कर किसके आधीन 
ए री  अब कैसे धरूँ मैं धीर 

१) रह रह हुक उठे मेरे मन में -२-
                  किस विधि मिलूँ अब इस जीवन में -२- 
ए री मेरे पाँव पड़ी जंजीर 
गुरु जी अब कैसे ................

२) मैं थी तुम्हारे जल की मछरिया -२- 
    काम लोभ  मोह के मगर ने घेरा -२-
अब कौन छुडावे भीर 
गुरु जी अब कैसे ................

३) निसदिन अँखियाँ बरस रही हैं -२- 
   तुमको चहुँ दिसी खोज रही हैं -२- 
ए री अब कौन बंधावे धीर 
गुरु जी अब कैसे ................

४) धोखा कैसा दे गए हो -२-
            किसके भरोसे छोड़ गए हो -२- 
ये कैसी फूटी तकदीर 
        गुरु जी अब कैसे ................


मित्रों 
पिछले एक हफ्ते से बहुत दुखी हूँ . मानो मेरा जीवन ही छिन गया हो , शरीर से आत्मा ही निकल गई हो ऐसा महसूस कर रही हूँ क्योंकि कुछ होने वाला हो तो पहले से इंसान अवगत रहता है लेकिन अचानक ही किसी पर पहाड़ टूट पड़े तो वो शायद ऐसा ही महसूस करता हो . 

महामंडलेश्वर विशुद्धानंद पीठाधीश्वर (हरिद्वार ) स्वामी धर्मदेव जी महाराज जी पिछले हफ्ते ९ अप्रैल को ब्रह्मलीन हो गए कहूं या कहूं उन्हें उनके भाइयों ने संपत्ति के लालच में मार दिया और आनन फानन अंतिम संस्कार कर दिया . न उनकी किसी को शक्ल दिखाई न ही किसी की बात सुनी और न ही उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखने दिया . मृत्यु के पश्चात भी उनके मुख , आँख , नाक , कान और मूत्रेन्द्रिय से रक्त बहता रहा तो प्रश्न उठता है कि 

१) क्या ऐसा संभव है कि इंसान की मृत्यु हो जाए और २०-२२ घंटे बाद भी जब उन्हें अंतिम स्नान कराया जाए तो रक्त बहता रहे ? 

२ ) हमें बताया गया कि उन्हें हार्ट अटैक आया और फिर एंजियोग्राफी करायी जिसमे बाईपास कराने को कहा गया लेकिन दस मिनट में ही उनके प्राण निकल गए तो क्या ऐसा संभव है कि जो एक हट्टा कट्टा इंसान हो सेहतमंद हो न ही ब्लड प्रेशर हाई रहता हो न ही कोई बिमारी हो अचानक उसका ये हाल हो जाए और उसे अटैक आ जाए और वो दस मिनट में ख़त्म हो जाए ?

३ ) उनके भाई ने किसी को आगे नहीं आने दिया और सब जगह कब्ज़ा करके बैठ गया है और वहां पानीपत के लोकल हॉस्पिटल में उन्हें दिखाया गया था और वहीँ उनसे किसी कागज़ पर हस्ताक्षर करवा लिए और अगले दिन सारी प्रॉपर्टी का खुद को मालिक सिद्ध करने लगा ये दिखाकर की विल मेरे नाम है तो क्या उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जा सकता ? 

४ ) क्योंकि उसने उन्हें समाधि नहीं देने दी और न ही किसी को अंतिम दर्शन करने दिए और उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया जिससे महाराज जी की संगत के पास कोई सबूत नहीं रहा तो उसे किस तरह दोषी सिद्ध किया जा सकता है क्या कोई जानकार इस पर रौशनी डाल सकता है ?

५) बस हमारे पास उनके फोटो हैं जिनमे उनके आँख नाक मुंह आदि से खून बह रहा है या फिर जब हॉस्पिटल में उन्हें straiture पर उन्हें लिटा रखा है और कोई भी इंस्ट्रूमेंट उन्हें नहीं लगाया हुआ और न ही उनके किसी भी अंग से तब खून बह रहा तो क्या कोई बता सकता है कि मरने के बाद इंसान के शरीर से खून कब तक बहता रहता है ?

६) पानीपत  में कंप्लेंट भी करवा दी है मगर समझ नहीं आ रहा कैसे न्याय मिलेगा ? 

मित्रों आप सबकी बहुत आभारी रहूँगी यदि इस सब पर रौशनी डाल सको और शेयर कर सको ताकि जानकार बता सकें कि उनके खिलाफ क्या एक्शन लिया जा सकता है ? 

चित्र ह्रदयविदारक है मगर फिर भी इसलिए लगा रही हूँ शायद कोई डॉक्टर मित्र इसमें हमारी मदद कर सके या कोई वकील मित्र इस पर प्रकाश डाल सके .

5 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपको सूचित किया जा रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शनिवार (18-04-2015) को "कुछ फर्ज निभाना बाकी है" (चर्चा - 1949) पर भी होगी!
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Sanju ने कहा…

Very nice post.. & welcome to my blog for new post.

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

श्रधा सुमन

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

अति दुखद। ईश्वर उन्हें शान्ति प्रदान करे।

Rakesh Kumar ने कहा…

रहना नही देश बिराना है
यह संसार झाड और झाखर
उलझ पुलझ मर जाना है