पेज

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

सोमवार, 10 अगस्त 2015

है न यही स्थिति

मैं और तू कहूँ
या तू ही तू कहूँ
या मैं ही मैं कहूँ 
भाव तो दो का ही बोध कराता है 

जब न मैं हो न तू 
बस प्रेम ही प्रेम हो 
बोध से परे 
आनंद ही आनंद हो 
वही तो परमानन्द है 
वही तो प्रेम है 
वही तो निराकारता है 

है न यही स्थिति तुम्हें पाने की , तुम में समाने की .........कृष्णा ! मोहना ! माधवा !

कोई टिप्पणी नहीं: