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सोमवार, 23 अगस्त 2010

उसका पता मिलता नहीं

अपना पता भूलती नहीं 
उसका पता मिलता नहीं 
नगरी नगरी , द्वारे द्वारे 
खोजती फिरूँ प्यारे को 
पर उसका ठिकाना मिलता नहीं 

कमली बन कर डोलूँ 
मन के वृन्दावन में खोजूँ
सांझ सकारे प्रीतम प्यारे 
दर्शन को तरसे नैना हमारे
मैं खोजत खोजत हारी 
मुझे मिले ना कृष्ण मुरारी
मुझे मुझसे मिला जाओ 
इक बार दरस दिखा जाओ
अपना मुझे बना जाओ
प्यारे अपना पता बता जाओ
मुझे मेरा "मैं " भुला जाओ
इक होने का आनंद चखा जाओ
प्रेमानंद में डूबा जाओ
श्याम अपनी श्यामा बना जाओ
ह्रदय की तडपन मिटा जाओ
जन्मो की प्यास बुझा जाओ
सांवरिया इक बार तो आ जाओ
सांवरिया इक बार तो आ जाओ

17 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

कमली बन कर डोलूँ
मन के वृन्दावन में खोजूँ

वाह क्या कहने
शानदार रचना ..

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

हमेशा की तरह भावपूर्ण बढ़िया रचना . रक्षाबंधन पर्व पर बधाई और शुभकामनाये....

मनोज कुमार ने कहा…

"मन के वृन्दावन में खोजूँ"

अच्छे बिम्ब का सुंदर प्रयोग।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

श्याम अपनी श्यामा बना जाओ
ह्रदय की तडपन मिटा जाओ
जन्मो की प्यास बुझा जाओ
सांवरिया इक बार तो आ जाओ
--
बहुत ही सुन्दर रचना है!
--
इससे भक्ति-भाव की प्रेरणा मिलती है!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

भक्तिरस में डूबी बहुत सुन्दर रचना ....कृष्ण तो छलिया है ...यूँ ही हैरान करता रहेगा :):)

kshama ने कहा…

Phir ek baar tumne" Mai ri,kase kahun...",ye geet yaad dila diya ...bahut sundar likhti ho!

Virender Rawal ने कहा…

प्रिय वंदना जी ,
आपकी भाव भक्ति को साधुवाद हैं , कृष्ण जी को तो आपने रिझा ही लिया था पर मेरे जैसे उद्दंड व्यक्ति से कहा दूसरा का प्रेम देखा जाता हैं . तो एक खिलाफत वाली कविता लिख ही डाली . ऐसे बुरे काम करने में तो मैं माहिर हु . भक्ति से समय मिले तो अभक्त की एक भेंट पर नज़र डाले
http://saralkumar.blogspot.com/2010/08/blog-post.html

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रेमाभिव्यक्ति।

राजभाषा हिंदी ने कहा…

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.
हिन्दी ही ऐसी भाषा है जिसमें हमारे देश की सभी भाषाओं का समन्वय है।

ललित शर्मा-للت شرما ने कहा…


अच्छी रचना है,
श्रावणी पर्व की शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई

लांस नायक वेदराम!---(कहानी)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

भाई-बहिन के पावन पर्व रक्षा बन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
--
आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/08/255.html

ललित शर्मा-للت شرما ने कहा…


बेहतरीन और अच्छी पोस्ट
शुभकामनाएं

आपकी पोस्ट ब्लाग वार्ता पर

सत्यप्रकाश पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर रचना.

Babli ने कहा…

वाह! शानदार और लाजवाब रचना लिखा है आपने!

अरुणेश मिश्र ने कहा…

समर्पण का उत्कर्ष प्रशंसनीय ।
वन्दना जी ! आपकी रचनाधर्मिता उत्कृष्ट है ।

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

man ke bhaavon ko sundar shabdo me aapane dhaala hai!...ati sundar kruti,badhaai!

अनुपमा पाठक ने कहा…

bahut sundar!