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बुधवार, 26 मई 2010

श्यामा , अपना मुझे बना लेना

    मैं भूल जाऊँ कान्हा , कुछ गम नहीं
    पर तुम ना मुझको भुला देना 
    श्यामा , अपना मुझे बना लेना
१) मैं तेरी जोत जलाऊँ या ना जलाऊँ 
    पर तुम ना मुझे भुला देना
   अपनी दिव्य ज्योति जगा देना
   कान्हा , अपना मुझे बना लेना 
२)मैं तुम्हें ध्याऊँ या ना ध्याऊँ 
   पर तुम ना मुझे भुला देना
   मेरा ध्यान निज चरणों में लगा लेना
   कान्हा , अपना मुझे बना लेना
३)मैं प्रीत निभाऊं या ना निभाऊं 
   तुम ना मुझे भुला देना
   प्रीत की रीत निभा देना
   श्यामा प्रेम का राग सुना देना 
   कान्हा, अपना मुझे बना लेना

मंगलवार, 11 मई 2010

मन की थकान

तन की थकान 
तो उतर भी जाये 
मन की थकान
कहाँ उतारूँ
किस पेड़ को 
साया बनाऊँ
किस डाल पर
झूला डालूँ
कहाँ मैं यादों का 
घरौंदा  बनाऊँ
कौन सा अब
फूल खिलाऊँ 

किस देहरी पर 
माथा नवाऊँ
किस आँगन को
मैं बुहारूँ
किस मकां की 
दहलीज पर
मन की
रंगोली सजाऊँ


तन की टूटन
जुड़ जाएगी
मन की टूटन
कहाँ जुडाऊँ
किस थाली में
मन को परोसूँ
कौन सा मैं
दीप जलाऊँ
किस देवता का 
करूँ मैं  पूजन
किस श्याम की
राधा बन जाऊँ

तन की थकन तो उतर भी जाए 
मन की थकन उतारने को 
किस श्याम का काँधा पाऊँ 
कौन सा नेह दीप जलाऊँ 
कौन सी बाँसुरी बजाऊँ 
जो श्याम दौडे चले आयें 
मुझ बिरहन को गले से लगायें 
मेरी युगों की थकन मिटायें 

शुक्रवार, 7 मई 2010

अश्क कैसे बहाऊँ?

तेरी याद में
जब अश्कों का 
दरिया बहता था
तब अंतस में
बैठा तू ही तो 
तड़पता था
आज तेरा 
ये अंदाज़ 
समझ आया है
जब मैं और तू
दो रहे ही नहीं 
जब तू ही वजूदमें समाया है 
हर ओर तेरा ही
नूर समाया है
जहाँ मेरा "मैं"
ना नज़र आता है
 जब एकत्व को
अस्तित्व प्राप्त
हो गया है
फिर बता साँवरे
अश्क अब
कैसे बहाऊँ?
तुझे अब कैसे
और तडपाऊँ?

रविवार, 2 मई 2010

"मोहब्बत " हो गयी

तुझे देखा
नहीं हुई
तुझे पाया 
नहीं हुई
तुझे चाहा
नहीं हुई
मगर 
जिस दिन
तुझे जाना
"मोहब्बत "
हो गयी