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बुधवार, 15 जून 2011

चंचल चंचल रे मना

चंचल चंचल रे मना
काहे चंचल होय
श्याम की ब्रजमाधुरी तो
वृन्दावन में होय

धीरज धीरज रे मना

थोडा धीरज बोय
चाहे सींचे सौ घड़ा
ऋतु आवन फल होय

भागे भागे रे मना

काहे भागे रोये
श्याम सुख सरिता तो
मन आँगन में होय 


निर्मल निर्मल रे मना
निर्मल मन जो होए
श्याम प्रेम का वास तो
वा तन में ही होय   





23 टिप्‍पणियां:

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

पुराने शब्दों को लेकर सुन्दर गीत रचा है आपने.. बहुत बढ़िया...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर भावों से रची सुन्दर रचना ..

रश्मि प्रभा... ने कहा…

भागे भागे रे मना
काहे भागे रोये
श्याम सुख सरिता तो
मन आँगन में होय
........ bahut hi bhawmay kerte ehsaas

Bharat Bhushan ने कहा…

भक्ति भाव के हिलोरों से भीगी रचना.

ana ने कहा…

kya baat hai.........amazing

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

भक्ति रस से सराबोर दोहे पढ़वाने के लिए आभार!

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर भावों से रची सुन्दर अभिव्यक्ति....

ZEAL ने कहा…

सुन्दर एवं गेय भक्तिभाव से परिपूर्ण रचना।
आनंददायी।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर, सरल, कोमल सी अभिव्यक्ति।

Unknown ने कहा…

सूर और जायसी के युग में पहुच गए हम , गीत मनभावन है बधाई

Patali-The-Village ने कहा…

सुन्दर भावों से रची सुन्दर रचना|

SAJAN.AAWARA ने कहा…

KHUBSURAT OR PYARI RACHA LIKHI HAI MAM APNE. . MAN PARSAN HO GYA. . MERA UTSAH BDHANE KE LIYE APKA BAHUT DHANYWAAD. . .
JAI HIND JAI BHARAT

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

शब्दों की झांझर यूँ बजी कि मन झूम उठा .बधाई.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


कुछ चिट्ठे ...आपकी नज़र ..हाँ या ना ...? ?

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर

Anita ने कहा…

बहुत मनभावन गेय प्रस्तुति !

M VERMA ने कहा…

सुन्दर है यह सूफियाना अन्दाज भी

श्यामल सुमन ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति वंदना जी
सादर
श्यामल सुमन
+919955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

Kailash Sharma ने कहा…

सार्थक सन्देश देती सुन्दर भावमयी प्रस्तुति..

Vivek Jain ने कहा…

बहुत सुंदर सरल सी रचना,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

भागे भागे रे मना
काहे भागे रोये
श्याम सुख सरिता तो
मन आँगन में होय ...


आन्तरिक भक्तिमय भावों की सहज प्रवाहमय सुन्दर रचना....

Manoranjan Manu Shrivastav ने कहा…

बहुत अच्छी कविता !
मन के बारे में बताती.

Manoranjan Manu Shrivastav ने कहा…

एक सलाह देना चाहूँगा
आपके ब्लॉग का बैक ग्राउंड सफ़ेद है, तो इस पे काला रंग के अक्षर ज्यादा सुकून देंगे आँखों को, नहीं तो ये आँखों में चुभते हुए से प्रतीत हो रहे हैं.