पेज

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

अब कौन रंग रांचू रे…




मनमोहक रूप नैनों में समाया
देख तेरे लिए मैंने जग को बिसराया
अब तू भी अपना बना ले मुझे
देख तेरे लिए मैंने खुद को भुलाया 


मै तो हो गयी श्याम की दीवानी अब कौन रंग रांचू रे……



हाय मोहन ! तुम ऐसे ही बस जाओ ना नैनन मे 

मै बावरी तुम्हें निहारूँ नित नित मन कुंजन मे


देखूं छवि चहुँ ओर तिहारी मै मन वृन्दावन मे 

हाय श्याम!क्यों मिल नही जाते बृज गलियन मे


 दृग चातक भये राह तकत श्याम 

अब बसो मेरे पलकन की ओटन मे


मै मीरा सी नाचूँ दीवानी भीज श्याम रंगन मे 


तुम्हरे प्रेम की बनूँ मै मूरत तिहारे मन दर्पण मे 


मै तो हो गयी श्याम की दीवानी अब कौन रंग रांचू रे……

4 टिप्‍पणियां:

Vaanbhatt ने कहा…

सुंदर रचना और कथ्य...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (26-04-2014) को ""मन की बात" (चर्चा मंच-1594) (चर्चा मंच-1587) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Ankur Jain ने कहा…

सुंदर रचना...

दिगंबर नासवा ने कहा…

कृष्ण के रँग में रंगने के बाद काहे का रँग ... भावपूर्ण रचना ...