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गुरुवार, 5 मार्च 2015

होली आई रे कन्हाई



होली में श्याम करें ठिठोली 
राधे से कैसे करें बरजोरी 

सोच में मोहन पड़ गए हैं 
गोपियों मध्य घिर गए हैं 

आज तो श्याम फंस गए हैं 
फिर तो राधे रंग में रंग गए हैं 

देख प्रीत की रीत श्याम की 
गोपियाँ हो गयीं सभी बाबरी 

एक सुर में फिर करें आग्रह 
होली आई रे कन्हाई रंग बरसे सुना दे जरा बांसुरी ........


होली के रंग सभी के जीवन को रंगमय बनाएं :)

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

रंगों के महापर्व होली की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (06-03-2015) को "होली है भइ होली है" { चर्चा अंक-1909 } पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar ने कहा…

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