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सोमवार, 26 अप्रैल 2010

ओ मेरे प्यारे

सुनो 
तुम्हें ढूंढ रही हूँ
जन्मों से 
रूह आवारा
भटकती 
फिरती है
इक तेरी 
खोज में
और तू 
जो मेरे
वजूद का 
हिस्सा नहीं
वजूद ही 
बन गया है
ना जाने 
फिर भी
क्यूँ मिलकर भी
नहीं मिलता
सिर्फ अहसासों में
मौजूद होने से
क्या होगा 
अदृश्यता में
दृश्यता को बोध 
होने से क्या होगा
नैनों के दरवाज़े से
दिल के आँगन में
अपना बिम्ब तो 
दिखलाओ 
इक झलक 
पाने को 
तरसती 
इस रूह की
प्यास तो 
बुझा जाओ 
ओ मेरे प्यारे
राधा सा विरह 
तो दे दिया
मुझे भी अपनी 
राधा तो बना जाओ

26 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

श्याम के रंग में रंगी इस पोस्ट की तारीफ के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं!
बहुत सुन्दर रचना है!

neelima garg ने कहा…

ati sundar...

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

Bahut sundar , prem ras kee dhaar !!

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

हे री मैं तो प्रेम दीवानी
मेरा दर्द न जाने कोय .....

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Kaise kanhu , kanhi shuru karte hi shabd khatm na ho jaye.

Ati Sunder

Shekhar Kumawat ने कहा…

me teri diwani ban gai gai he shayam mujhe apna le

bahut khub

shekhar kumawat

kshama ने कहा…

Wah, Vandana, wah!

दीपक 'मशाल' ने कहा…

prem rang na padwe feeka..
aap roj hi likhti hain kya, ya pahle ke likhe hain ye sare?/

rashmi ravija ने कहा…

और तू
जो मेरे
वजूद का
हिस्सा नहीं
वजूद ही
बन गया है
बहुत ही गहरी पंक्तियाँ...सुन्दर रचना

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Bahut khoob ... Raadha sa virah de kar Raadha nahi banaata ... bahut hi ache bhaav hain .. meetha sa ulhaana deti hai ye khoobsoorat rachna ..

रोहित ने कहा…

prem ke pavitra ehsaas me lipti ek khubsurat kavita...
kafi accha laga padhkar.
regards-
#ROHIT

रोहित ने कहा…

prem ke pavitra ehsaas me lipti ek khubsurat kavita...
kafi accha laga padhkar.
regards-
#ROHIT

sangeeta swarup ने कहा…

कृष्ण के प्रेम में पगी खूबसूरत कृति....मन आनंदित हुआ ..

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी पोस्ट।

दिलीप ने कहा…

waah mujhe radha bana to jao..bahut khoob...

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना ... ह्रदय की ब्याकुलता को दर्शाती ...

कविता रावत ने कहा…

प्रेम की व्याकुलता दर्शाती भावपूर्ण रचना
.......हार्दिक शुभकामनाएं

अखिलेश शुक्ल ने कहा…

आपने राधा का विरह और आम भारतीय स्त्री की पीड़ा को सफल अभिव्यक्ति दी है।
वजूद बन गया ैै ना जाने फिर भी कहकर आप बहुत कुछ कह देती ह।

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) ने कहा…

सच में वंदना जी उस अनन्त शक्ति से विरह का जो अहसास है ,, आत्मा की जो तड़पन है , है वो ना जाने कितने दुखो के बराबर है ,,,,,आत्मा की छट पटाहट और मिलन की उत्कंठा की हद दिखाती रचना
सादर
प्रवीण पथिक
9971969084

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

nice.

Fauziya Reyaz ने कहा…

bahut hi khoobsurat...

aruna kapoor 'jayaka' ने कहा…

aapne bahutahi sunder shabdon ka guldasta pesh kiya hai, dhanyawaad!

Renu Sharma ने कहा…

shabdon ki gahraai main hi bhavarth chhupa hai
bahut kuchh kah diya hai.
achchha laga

infinitive ने कहा…

dil ko chhu jati hai

infinitive ने कहा…

dil ko chhu jati hai

anant ने कहा…

dil ko chhu gaya