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बुधवार, 6 मार्च 2013

फिर कहो कैसे कहूँ मैं रीता ही वापस आया

जैसा घट मेरा रीता वैसा ही तुम्हारा पाया
कभी कर प्रलाप कभी कर आत्मालाप
सुख दुख की सीमा पर ही आत्मसुख मैने पाया
तुम्हारी शरण आकर ही अविच्छिन्न सुख मैने पाया
फिर कहो कैसे कहूँ मैं रीता ही वापस आया


हे जगदाधार , घट घटवासी ,अविनाशी

ये जीवन था निराधार , आधार मैने पाया
जो छोड सारे द्वंदों को तेरी शरण मैं आया
कर नमन तुझको , जीवन सार मैने पाया
फिर कहो कैसे कहूँ मैं रीता ही वापस आया


अपूर्ण था अपूर्ण ही रहता जो ना तुमको ध्याता

तुमने अपना वरद हस्त रख सम्पूर्ण मुझे बनाया
जो कभी कहीं भरमाया तुमने ही रास्ता दिखलाया
अपनी शरण लेकर तुमने मुझे निर्भय बनाया
फिर कहो कैसे कहूँ मैं रीता ही वापस आया

15 टिप्‍पणियां:

Anupama Tripathi ने कहा…

bahut sundar prastuti Vandana ji ....

bahut sundar .

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

भगवान् की शरण में पहुँच कर भला कौन रीता रह सकता है .... सुन्दर प्रस्तुति

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

Rajendra Kumar ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति,सादर आभार.

Kalipad "Prasad" ने कहा…

वंदना जी ! मेरे मन में कुछ ऐसे ही बादल उमड़ घुमड़ रहे थे परन्तु निकलने का रास्ता नहीं मिलरहा था ,आपने मनोहारी शब्दों में उसे सजा दिया. दिल को तसल्ली मिली, इस सोच में मैं अकेला नहीं.- बस इतना -मैं "रीता" नहीं

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

ati sundar....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल गुरूवार (07-03-2013) के “कम्प्यूटर आज बीमार हो गया” (चर्चा मंच-1176) पर भी होगी!
सूचनार्थ.. सादर!

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज के ब्लॉग बुलेटिन पर |

THAKOR RAAJ ने कहा…

Bahot hu Badhiya VANDNA JI
So Good

THAKOR RAAJ ने कहा…

so Good VANDNA JIII

THAKOR RAAJ ने कहा…

Bahot hu Badhiya VANDNA JI
So Good

दिनेश पारीक ने कहा…

बहुत खूब आपके भावो का एक दम सटीक आकलन करती रचना
आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
तुम मुझ पर ऐतबार करो ।
पृथिवी (कौन सुनेगा मेरा दर्द ) ?

HARSHVARDHAN ने कहा…

दिल से निकली रचना प्रस्तुत की है आपने। आभार। :)

नये लेख :- समाचार : दो सौ साल पुरानी किताब और मनहूस आईना।
एक नया ब्लॉग एग्रीगेटर (संकलक) : ब्लॉगवार्ता।

HARSHVARDHAN ने कहा…

दिल से निकली रचना प्रस्तुत की है आपने। आभार। :)

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