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सोमवार, 22 जुलाई 2013

अखंड जोत प्यासी है






अखण्ड जोत प्यासी है 
हरि दर्शन की अभिलाषी है
तन मन भीगा राम रस मे 
फिर भी देखो प्यासी है 
तृष्णा सारी मिट गयी 
पल पल देखो जल रही है
प्रभु विरह में पल रही है
घर आँगन रौशन कर रही 
भंवर जाल में फँसी 
प्रभु स्नेह को तरस रही है
ये कैसी तुम्हारी महिमा न्यारी है
दर्शन दे दो कृपानिधान
जन्म जन्म की प्यासी है
ये तुम्हारी दिव्य ज्योति सुकुमारी 
दिव्य दर्शनों की अभिलाषी है 
अखंड जोत प्यासी है 
प्रभु अखंड जोत प्यासी है .............


गुरु पूर्णिमा पर :

ज्ञान की ज्योत जगाई 
भक्ति की अलख लगाई 
गुरु बिन ज्ञान कहाँ से पाती 
आनन्दघन से कहाँ मिल पाती 
धन्य धन्य हो गयी आज 
जो खुदाई नूर से हो गयी लाल 

श्री गुरु चरणों में शत - शत नमन

https://www.youtube.com/watch?v=1X6-cYyz134


6 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

गुरुकुल को शत शत नमन।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
गुरू पूर्णिमा पर सभी गुरुजनों को नमन!

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन जानिए क्या कहती है आप की प्रोफ़ाइल फोटो - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

kshama ने कहा…

Bhagwan kare tum itna badhiya hamesha likhti raho!

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति !
latest दिल के टुकड़े
latest post क्या अर्पण करूँ !

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बहुत सुन्दर. सभी गुरुओं को नमन ! शुभकामनाएँ.