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बुधवार, 18 जून 2014

कभी गुजरना शून्य से


ना शब्द ना भाव
ना रूप ना रंग
संज्ञाशून्य हो जाना
अपलक शून्य मे ताकना
और अन्तस मे
शून्य की परिधि से बाहर
निकलने की खोज का जारी रहना
किसी खगोलीय घटना की तरह
कभी गुजरना शून्य से
तब जानोगे शून्यबोध की व्यथा ……एक अन्तर्कथा निर्विकार निर्लेप सी

4 टिप्‍पणियां:

Vaanbhatt ने कहा…

ये भी एक गज़ब अनुभूति है...संवेदनशील व्यक्ति इस अवस्था का अनुभव कर सकता है...

वाणी गीत ने कहा…

शून्य में गए बिना शून्यबोध मुश्किल है जानना !

रश्मि प्रभा... ने कहा…

http://bulletinofblog.blogspot.in/2014/06/blog-post_19.html

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

शून्य बोध अति आवश्यक है।