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शनिवार, 5 सितंबर 2015

आज तो बहुत बिजी होंगे तुम



आज तो बहुत बिजी होंगे तुम
चारों तरफ तुम ही तुम
तुम्हारी ही पूछ
नाक पर मक्खी भी नहीं बैठने दे रहे होंगे .....है न

खुश तो बहुत होंगे
अच्छा लगता है न
जब हर तरफ अपनी ही पूछ हो
कुछ ख़ास हों एक दिन के लिए

मगर कभी सोचा
वो कहाँ जाएँ , कहाँ पायें तुम्हें
जिनके सिर्फ तुम ही एक आधार थे
तुम थे तो धड़कन थी
तुम थे तो श्रृंगार था
तुम थे तो जीवन था
ये किस तपते रेगिस्तान में छोड़ गए हो
जहाँ दूर दूर तक प्यास के पंछी फडफडाते दिखते हैं
और प्यास द्रौपदी के चीर सी नित निरंतर बढती जाती है
मगर तुम्हें न कहीं पाती है

सोचा कभी
जिनका कोई आधार नहीं होता
उसके एकमात्र आधार तुम ही हो ......कहा था तुमने
और जब तुमने ही पाँव के नीचे से जमीन खिसका ली
बताओ तो जरा
कहाँ ठौर पायें वो गुजरिया
कैसे जन्मदिन मनाएं तुम्हारा सांवरिया
जब तुम ही सामने न हों ..........

और मैं हूँ ही कौन तुम्हारी
जो नज़र में तुम्हारी जगह बना पाती
और उम्र मेरी उसी में गुजर जाती

जाओ खुश रहो मोहन
मनाओ ठाठ से अपना जन्मदिन
हमारा क्या है
कल भी ठूंठ थे आज भी ठूंठ ही हैं
और फिर एक मेरे न होने से
कोई कमी न होगी तुम्हारी महफ़िल में

मेरी प्रीत ने तो अभी कच्चा स्नान किया था
फिर कैसे तुमने मुख मोड़ लिया ?
कभी सोचना इस पर भी फुर्सत में
आज तो बहुत बिजी होंगे तुम ...........सांवरे !!!

वैसे भी हर किसी का अपना दिन होता है
और आज तुम्हारा दिन है
वैसे कह सकते हो ........ हर दिन तुम्हारा ही तो है
फिर भी
आता है एक दिन तेरे चाहने वालों का भी
जिस दिन तू कटघरे में खड़ा होता है
और मुझे इंतज़ार है उसी दिन का ...........

जन्मदिन मुबारक हो श्याम ........

1 टिप्पणी:

Kavita Rawat ने कहा…

शायद भगवान ने आँख मूंद ली संसार से। .
सामयिक चिंतन प्रस्तुति हेतु आभार
जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनाएं