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शनिवार, 12 मार्च 2011

कैसे खेलूँ मैं कन्हाई

कैसे खेलूँ मैं कन्हाई 
तेरे संग प्रीत की होरी 

ब्रज गोपियाँ  
ढूँढें गली गली 
प्रेम की ओढ़ चुनरिया 
 यहाँ वहां जहाँ तहां देखा
मिला न श्याम सलोना  
 जा बैठा छुप के 
मैया के आँचल में
कैसे ढूंढूं मैं कन्हाई 
कैसे खेलूँ मैं कन्हाई
तेरे संग प्रीत की होरी  


श्याम रंग की 
भर पिचकारी 
जब सखियों ने मारी
मैं भी हो गयी श्याम रंग में 
मैं भी रंग गयी श्याम रंग में
सुन मेरे ओ कन्हाई
अब तो आ जा रे सांवरिया
अब तो मिल जा रे सांवरिया
कैसे खेलूँ मैं कन्हाई
तेरे संग प्रीत की होरी 


प्रीत की रीत मैं नाही जानूं 
होरी को बन गयो बहानो 
श्याम से मिलने है जानो 
अब न चलेगो कोई बहानो
आ जा आ जा रे सांवरिया
गले लगा जा रे सांवरिया
श्याम रंग में भिगो जा रे सांवरिया
दुल्हनिया अपनी बना जा रे सांवरिया
प्रेम रस पिला जा रे सांवरिया
फाग मेरी भी मना जा रे सांवरिया
होरी की रीत निभा जा रे सांवरिया
पूरण कर जा हर आस रे सांवरिया
छूटे अब ये भव त्रास रे सांवरिया
होरी का रंग ऐसा चढा जा रे सांवरिया
सुध बुध खो बन जाऊँ जोगनिया
मै तेरी तू मेरा बन जाये रे सांवरिया
इक दूजे मे खो जायें रे सांवरिया
रंग मे रंग मिल जाये रे सांवरिया
इक रंग हो जायें रे सांवरिया 
होरी हो जाये सार्थक रे सांवरिया
प्रीत चढ जाये गगन रे सांवरिया

19 टिप्‍पणियां:

सतीश सक्सेना ने कहा…

फागुन का आनंद दे गयी यह पोस्ट ! हार्दिक शुभकामनायें और आभार !!

Kajal Kumar ने कहा…

वाह बासंती स्वाद वाली कविता है ये आपकी. :)

रश्मि प्रभा... ने कहा…

preet ki hori kanha
khelun baljori...
holi aur gokul dono aankh mein utar aaye

Atul Shrivastava ने कहा…

'कैसे खेलूं मैं कन्‍हाई
तेरे संग प्रीत की होली'
होली के रंग में सराबोर करती रचना।
आपने होली की मस्‍ती का अ‍हसास करा दिया।

Manpreet Kaur ने कहा…

bouth he aache poem hai aapke aacha laga read kar ke... sukriya
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संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव ...कान्हा के साथ तो जोर ज़बरदस्ती से होली खेलनी होती है :):)

अजय कुमार झा ने कहा…

तो गोया आप भी फ़ौरन में बौरानी लगी हैं । अब जब आपने शंख में रंग भर के बिगुल फ़ूंक ही दिया है तो फ़िर हम भी होलियाने की तैयारी करते हैं

kase kahun?by kavita. ने कहा…

holi par rang bhari shubhakamnayen....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर और आनन्ददायक होली गीत!
आज हमने भी होली का ही गीत लिखा है और वो भी कान्हा की होली का!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर और आनन्ददायक होली गीत!
आज हमने भी होली का ही गीत लिखा है और वो भी कान्हा की होली का!

शिखा कौशिक ने कहा…

Vandna ji bahut sundar holi geet prastut kiya hai aapne . Holi ki hardik shubhkamnayen .

राज भाटिय़ा ने कहा…

फ़ागुन के रंग मे रंगी सुंदर रचना, धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

वाह! आनन्ददायी पोस्ट!!!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

होली का माहौल बनाती सुन्दर सी कविता।

ZEAL ने कहा…

होली का माहौल बनती रोमैंटिक रचना ...आनंद आ गया।

G.N.SHAW ने कहा…

!अतिसुन्दर ... होली मुबारक हो !..

कुमार राधारमण ने कहा…

माहौल बना दिया आपने।

kshama ने कहा…

Khoob khelo horee...par meri e-mail to padho! Mera sim card erase ho gaya hai...mujhe tumhara cell no chahiye dobara,please!

krishna guru ने कहा…

//होरी हो जाये सार्थक रे सांवरिया//
शुभकामनायें और आभार