प्रधानमंत्री जनधन खाता योजना कितनी सार्थक रहेगी ये तो वक्त ही बतायेगा मगर आज तो एक एक आदमी तीन तीन बैंकों में खाते खुलवा रहा है उसका लाभ पाने को जो यही सिद्ध कर रहा है ………आप मौका तो दीजिये ………अब तक औरों ने लूटा अब हम खुद लूट लेंगे ………जाने क्या सोच कर ये योजना लागू की गयी है जिससे बात करो यही कहता है ये फ़्लॉप होगी यहाँ तो हर डाल पर चोर बैठे हैं ………कहीं ये सिर्फ़ अपनी छवि सुधारने भर की कवायद तो नहीं ? कहीं इस तरह जनता के दिल में जगह बनाने की कोशिश तो नहीं फिर चाहे इस योजना का लाभ भी सबको मिले न मिले मगर जगह जगह फ़ैले सांप्रदायिक तनाव , अव्यवस्था , बलात्कार जैसी घटनायें आदि जो कुछ देश में हो रहा है उससे ध्यान भटकाने का प्रयास है …………फ़िलहाल तो इस योजना का कोई औचित्य नज़र नहीं आ रहा जब तक सही ढंग से लागू न की जाती ………आनन फ़ानन खाते खोलो बस एक फ़रमान सुना दिया गया मगर ये नही सोचा गया क्या वास्तव में इसका फ़ायदा जिस तबके के लिए प्रयोग किया गया है उसे होगा भी या नहीं ? …………
सही या गलत तो भविष्य ही बतायेगा मगर एक व्यक्ति यदि तीन तीन जगह खाते खुलवायेगा तो सोचिए नुकसान किसका होगा ? क्या देश का और टैक्स देने वालों का नुकसान नही होगा इससे ? ये तो अभी एक ही उदाहरण पता चला है ऐसे न जाने कितने और नये घोटाले इस माध्यम से शुरु हो जायेंगे ………क्योंकि इसका फ़ायदा उठाने के लिए शरारती तत्व भी सक्रिय हो जाएंगे तब कैसे पता चल पायेगा कि किसने कितने खाते खुलवाए ? क्या एक सिर्फ़ आधार के माध्यम से ये सब संभव हो पायेगा ? …………इंतज़ार में हैं अब तो हम देखें अच्छे दिन और क्या क्या गुल खिलाते हैं ।
सही या गलत तो भविष्य ही बतायेगा मगर एक व्यक्ति यदि तीन तीन जगह खाते खुलवायेगा तो सोचिए नुकसान किसका होगा ? क्या देश का और टैक्स देने वालों का नुकसान नही होगा इससे ? ये तो अभी एक ही उदाहरण पता चला है ऐसे न जाने कितने और नये घोटाले इस माध्यम से शुरु हो जायेंगे ………क्योंकि इसका फ़ायदा उठाने के लिए शरारती तत्व भी सक्रिय हो जाएंगे तब कैसे पता चल पायेगा कि किसने कितने खाते खुलवाए ? क्या एक सिर्फ़ आधार के माध्यम से ये सब संभव हो पायेगा ? …………इंतज़ार में हैं अब तो हम देखें अच्छे दिन और क्या क्या गुल खिलाते हैं ।




