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रविवार, 28 सितंबर 2014

आओ करें आराधना



चतुर्थ दिवस चतुर्थ रूप कू्ष्मांडा का अनूप 
धन धान्य सम्पदा से जीवन भरती भरपूर 

माँ की आराधना करे रोग शोक का नाश  
आयु यश और बल से भरा रहे भण्डार 

माँ की दिव्यता का नित्य करो गुणगान 
भवसागर से बिन प्रयास हो जाओगे पार 

4 टिप्‍पणियां:

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
जय मातारानी की

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (29-09-2014) को "आओ करें आराधना" (चर्चा मंच 1751) पर भी होगी।
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चर्चा मंच के सभी पाठकों को
शारदेय नवरात्रों की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Vaanbhatt ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति...

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
Recent Post ..उनकी ख्वाहिश थी उन्हें माँ कहने वाले ढेर सारे होते